ग़ज़ल - इंसा तू नियामत ख़ास बना आम क्यों है ?
इंसा तू नियामत ख़ास बना आम क्यों है,
झाँक ले मन में ज़रा कि तू बदनाम क्यों है ।
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ज़िंदगी एक अनोखी जो मिली है तुझे,
पशुता से तेरी जलता ये आवाम क्यों है ।
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अहं को छोड़ दे अब ज़रा तो झुक जा,
बोई पौध है खुद से अब इंतक़ाम क्यों है ।
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तराशा जिसने तेरी माटी को किया सोना,
सोने को कर मिट्टी करता नीलाम क्यों है ।
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खुद ही है चुनता है रास्ते ग़लत सब,
कहता हाय ! मिला बुरा अंजाम क्यों है ।
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अपनी ग़लत सोच को तो बदल ले ज़रा,
लालच में बिकता कौड़ियों के दाम क्यों है ।
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जो एक बार को मिला है ये मौक़ा तुझे,
‘मिलन’ कहे राम का लेता न नाम क्यों है ।
भावना अरोड़ा ‘मिलन’
कालकाजी, नई दिल्ली
Very Nice Mam😀
जवाब देंहटाएंआभार आपका❣️
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